श्री हनुमान चालीसा : श्रद्धा, शक्ति और समाधान का दिव्य स्रोत।
तुलसीदास जी की अमर रचना की विशेष चौपाइयों का अर्थ और इसका वैश्विक प्रभाव
श्री हनुमान चालीसा : श्रद्धा, शक्ति और समाधान का दिव्य स्रोत। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और रचना।
श्री हनुमान चालीसा की रचना 16वीं शताब्दी में भक्ति काल के महान कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा की गई थी। पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक किंवदंतियों के अनुसार, जब मुगल सम्राट अकबर ने तुलसीदास जी को अपनी शक्ति दिखाने या चमत्कार करने के लिए बंदी बना लिया था, तब उन्होंने जेल में ही हनुमान जी की स्तुति में इन 40 चौपाइयों को रचा था।

यह पूरी रचना अवधी भाषा में है। अवधी उस समय की सरल लोकभाषा थी, जिसने इसे जन-जन तक पहुँचाया। चालीसा का अर्थ है 40 पंक्तियों का समूह। यह रचना न केवल आध्यात्मिक है, बल्कि इसमें भक्ति, दर्शन और जीवन जीने की कला का अद्भुत मिश्रण है।इसमें 2 प्रारंभिक दोहे, 40 चौपाइयां और 1 अंतिम दोहा है।
- द्वारा लिखित- डॉ. नम्रता मिश्रा तिवारी, मुख्य संपादक http://indiainput.com
श्री हनुमान चालीसा : प्रारंभिक दोहे
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
अर्थ- “मैं अपने गुरु के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को साफ करता हूँ और भगवान राम के उस निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) देने वाला है।”
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥
अर्थ- “हे पवनपुत्र, मैं खुद को बुद्धिहीन जानकर आपका स्मरण करता हूँ। आप मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि और ज्ञान प्रदान करें और मेरे सभी दुखों व दोषों को दूर करें।”
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— श्री (@shree_2_2) January 19, 2026
श्री हनुमान चालीसा : कुछ विशेष चौपाइयां और उनके गहरे अर्थ।
हनुमान चालीसा की हर पंक्ति मंत्र के समान प्रभावशाली है, लेकिन कुछ चौपाइयां भक्तों के बीच विशेष महत्व रखती हैं।
“बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥”
यह दोहा अहंकार को त्यागने की सीख देता है। भक्त स्वयं को बुद्धिहीन मानकर हनुमान जी से शक्ति, सद्बुद्धि और ज्ञान की प्रार्थना करता है ताकि जीवन के क्लेश और मानसिक विकार दूर हो सकें।
“संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥”
यह सबसे लोकप्रिय पंक्तियों में से एक है। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति वीर हनुमान का स्मरण करता है, उसके सभी शारीरिक और मानसिक कष्ट समाप्त हो जाते हैं। यह पंक्ति आत्मविश्वास और सुरक्षा का भाव जगाती है।
“अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥”
यहाँ हनुमान जी की शक्तियों का वर्णन है। उन्हें माता सीता से यह वरदान प्राप्त है कि वे किसी को भी 8 प्रकार की सिद्धियाँ और 9 प्रकार की निधियाँ (सम्पत्ति) दे सकते हैं। यह चौपाइयां भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि की प्रतीक हैं।
- अष्ट सिद्धि
सिद्धियाँ वे अलौकिक शक्तियाँ हैं जो कठिन तपस्या और योग से प्राप्त होती हैं। हनुमान जी इन सभी के स्वामी हैं ।
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अणिमा: शरीर को एक अणु (atom) के समान अत्यंत छोटा कर लेने की शक्ति। (जैसे लंका में प्रवेश के समय किया था)।
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महिमा: शरीर को विशाल और असीमित रूप देने की शक्ति। (जैसे सुरसा के सामने किया था)।
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गरिमा: अपने शरीर का भार या वजन असीमित रूप से बढ़ा लेने की शक्ति।
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लघिमा: शरीर को रुई के समान अत्यंत हल्का कर लेने की शक्ति जिससे हवा में उड़ा जा सके।
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प्राप्ति: बिना किसी बाधा के किसी भी स्थान पर पहुँच जाने और अदृश्य वस्तुओं को देख लेने की शक्ति।
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प्राकाम्य: पृथ्वी की गहराइयों में जाने या आकाश में कहीं भी विचरण करने की इच्छाशक्ति।
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ईशित्व: ईश्वर के समान प्रभुत्व प्राप्त करना और पूरी सृष्टि पर नियंत्रण रखने की शक्ति।
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वशित्व: किसी को भी अपने वश में करने या इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण पाने की शक्ति।
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नौ निधि
निधियाँ कुबेर के खजाने की नौ दिव्य संपत्तियाँ मानी जाती हैं, जो सुख और ऐश्वर्य का प्रतीक हैं।
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पद्म निधि: सात्विक गुणों से युक्त धन और सोने-चांदी की प्राप्ति।
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महापद्म निधि: पीढ़ियों तक चलने वाली अपार संपत्ति और धार्मिक दान की प्रवृत्ति।
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नील निधि: व्यापार और रत्न-आभूषणों में निरंतर लाभ।
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मुकुंद निधि: कला, संगीत और राज्य कार्यों में सफलता दिलाने वाली संपत्ति।
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नन्द निधि: सुख, शांति और लंबी आयु प्रदान करने वाली संपत्ति।
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मकर निधि: अस्त्र-शस्त्र और कलात्मक संग्रह में निपुणता।
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कच्छप निधि: खुद की संपत्ति को सुरक्षित रखने और धैर्य पूर्वक संचय करने की शक्ति।
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शंख निधि: आत्मिक शांति और पारिवारिक सुख देने वाली संपत्ति।
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खर्व निधि: शत्रुओं पर विजय और मिश्रित धातुओं/संपत्ति का भंडार।
“नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥”
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह पंक्ति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। निरंतर नाम जपने से मानसिक शांति मिलती है, जो रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है।

श्री हनुमान चालीसा : पाठ करने का उत्तम समय।
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ब्रह्म मुहूर्त: सूर्योदय से पूर्व (प्रातः 4:00 से 6:00 के बीच) पाठ करना सबसे श्रेष्ठ है। इस समय वातावरण शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होता है।
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संध्या काल: सूर्यास्त के समय हनुमान चालीसा का पाठ करने से दिन भर का मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-शांति आती है।

श्री हनुमान चालीसा : भारत और वैश्विक स्तर पर प्रभाव
भारत में हनुमान चालीसा एक सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। गाँव की चौपाल से लेकर महानगरों के आधुनिक घरों तक, इसका पाठ हर जगह होता है। यह भारतीय समाज में साहस और निस्वार्थ सेवा का संचार करती है।
वैश्विक प्रभाव-
आज हनुमान चालीसा केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका के ओबामा जैसे राजनेता अपनी जेब में हनुमान जी की छोटी मूर्ति रखते थे, और पश्चिम के कई प्रसिद्ध संगीतकारों ने चालीसा को अपनी धुनों में पिरोया है। आधुनिक मनोविज्ञान में इसे ‘साउंड हीलिंग’ के रूप में देखा जाता है। इसकी लयबद्धता और शब्दों का उच्चारण मस्तिष्क में सकारात्मक कंपन पैदा करता है, जो अवसाद और चिंता को कम करने में सहायक है।
स्रोत : http://x.com
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