सावधान ! “कहीं आप भी तो नहीं हो रहे इस ‘पैनिक गैंग’ का शिकार?”
#जनवरी 2026 की सबसे बड़ी अफवाह का फैक्ट चेक।
सावधान ! “कहीं आप भी तो नहीं हो रहे इस ‘पैनिक गैंग’ का शिकार?” आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर ऐसी कई कहानियां वायरल होती हैं जो तुरंत हमारा ध्यान खींच लेती हैं। लेकिन हर चमकती चीज सोना नहीं होती। इनमें से कई खबरें असली नहीं होतीं, बल्कि किसी उत्पाद या फिल्म को बेचने के लिए रची गई चालाक चालें होती हैं। हाल ही में एक नया और खतरनाक ट्रेंड सामने आया है, जहां गुमशुदा बच्चों जैसे गंभीर मुद्दों पर झूठा डर फैलाया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि लोग डरें, बातें करें और किसी ब्रांड या फिल्म को मुफ्त की पब्लिसिटी मिल जाए। यह किसी भरे हुए कमरे में आग-आग चिल्लाने जैसा है, सिर्फ इसलिए ताकि भगदड़ मचे और कोई अपना सामान बेच सके।
द्वारा – डॉ. नम्रता मिश्रा तिवारी, मुख्य संपादक http://indiainput.com
#January 2026 का वायरल सच
इसका सबसे ताज़ा उदाहरण January 2026 में भारत में देखने को मिला। X और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर अचानक ऐसे वीडियो और पोस्ट की बाढ़ आ गई, जिनमें दावा किया गया कि Delhi में साल के पहले कुछ हफ्तों में ही 800 से ज्यादा बच्चे गायब हो गए हैं। इसी तरह की अफवाहें Mumbai को लेकर भी फैलाई गईं कि वहां 36 दिनों में 82 बच्चे लापता हुए हैं। इन आंकड़ों ने माता-पिता के मन में गहरा डर पैदा कर दिया और आम जनता में गुस्सा भर दिया। सोशल मीडिया पर missing जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे और लोगों ने बिना सच्चाई जाने इन पोस्ट्स को शेयर करना शुरू कर दिया।
So the ‘800 missing children’ news from Delhi has now turned out to be fake, a pure publicity stunt.
Crying in theatres, screaming, and tearing clothes for film promotions had already become outdated, so Bollywood seems to have stooped to an even lower level this time.
To… pic.twitter.com/S0Cs2XsPMX
— Adarsh (@OpinionKraft) February 6, 2026
पुलिस की सख्ती और असलियत
जब यह शोर बहुत ज्यादा बढ़ गया, तो पुलिस को दखल देना पड़ा। #Mumbai Police ने इन दावों को पूरी तरह से झूठा और भ्रामक बताया। उन्होंने साफ किया कि पुराने या सामान्य आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है ताकि पैनिक फैलाया जा सके। पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ केस भी दर्ज किए। उधर #Delhi Police ने भी स्पष्ट किया कि शहर में लापता होने के मामलों में कोई अचानक बढ़ोतरी नहीं हुई है। औसतन हर महीने करीब 2000 लोग मिसिंग रिपोर्ट होते हैं, जो कि एक सामान्य आंकड़ा है, कोई नई आपदा नहीं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक न करें।
Over the past week or so, several videos and messages circulating online claimed that 800 children had gone #missing in the first three weeks of January.#MumbaiPolice was the first to investigate the matter and found that false messages and rumours were being widely circulated pic.twitter.com/SzeGjUNid5
— Delhi Times (@DelhiTimesTweet) February 7, 2026
फिल्म प्रमोशन का खेल?
अब सवाल यह उठता है कि अचानक यह डर क्यों फैलाया गया? जानकारों का मानना है कि इसका सीधा कनेक्शन बॉलीवुड फिल्म #Mardaani 3 की रिलीज से था। Rani Mukerji की यह फिल्म चाइल्ड ट्रैफिकिंग यानी बच्चों की तस्करी पर आधारित है। आरोप लगे कि #Yash Raj Films ने फिल्म का माहौल बनाने के लिए पेड प्रमोशन का सहारा लिया और मिसिंग बच्चों के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर वायरल करवाया। Delhi Police ने भी इशारों में कहा कि इन पोस्ट्स को पेड प्रमोशन के जरिए पुश किया गया था। यहां तक कि कुछ राजनेताओं ने भी इसे फिल्म की मार्केटिंग का हिस्सा बताया। हालांकि, YRF ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया, लेकिन फैक्ट चेकर्स ने पाया कि फिल्म की थीम से मेल खाने के लिए पुराने डाटा को सनसनीखेज बनाया गया था।
Its a cheap PR trick to promote a soon-to-be release Bollywood film. The news about 800 children missing in Delhi was released by a leading news agency PTI without substantiating and top media houses took it up without applying the basic rule of journalism-check, recheck, verify,… https://t.co/J1CHXCPGiM pic.twitter.com/741AQCvGWz
— Jagdish Upasane (@jdupasane) February 5, 2026
समाज पर बुरा असर
यह मार्केटिंग का तरीका इसलिए काम करता है क्योंकि डर ऑनलाइन बहुत तेजी से फैलता है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और मीडिया पेजों को पैसे देकर ऐसी खबरें शेयर करवाई जाती हैं, जो लाखों लोगों तक पहुंचती हैं। फिल्म को तो पब्लिसिटी मिल जाती है, लेकिन इसका समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इससे पुलिस पर लोगों का भरोसा कम होता है और माता-पिता को बेवजह तनाव झेलना पड़ता है। भारत में हर साल हजारों महिलाएं और बच्चे सच में गायब होते हैं और 100000 से ज्यादा लोग लंबे समय तक नहीं मिलते। जब ऐसी फर्जी खबरें फैलती हैं, तो पुलिस और जनता का ध्यान उन असली पीड़ितों से हट जाता है जिन्हें वाकई मदद की जरूरत है।
हमारी जिम्मेदारी
इस तरह के हथकंडों से बचने का एक ही तरीका है कि हम जागरूक बनें। किसी भी खबर को शेयर करने से पहले उसके सोर्स की जांच जरूर करें। पुलिस के आधिकारिक बयान और Alt News जैसी फैक्ट चेक वेबसाइट्स की मदद लें। सरकारों को भी ऐसे स्टंट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, जैसा कि Mumbai Police ने किया है। फिल्म या प्रोडक्ट बेचना गलत नहीं है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल करके मुनाफा कमाना अनैतिक और खतरनाक है। एक जागरूक नागरिक के तौर पर हमें ब्रांड्स से बेहतर व्यवहार की मांग करनी चाहिए और इस पैनिक मशीन को रोकने के लिए सतर्क रहना चाहिए।
स्रोत : http://pibfactcheck.in
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