#keepgoingpunch #कीपगोइंगपंच : … लेकिन उम्मीद बाकी !
जापानी ज़ू का अनाथ बंदर खिलौने को माँ मानकर जी रहा—मनोविज्ञान बताता है ये कमी कितनी गहरी
#keepgoingpunch #कीपगोइंगपंच : … लेकिन उम्मीद बाकी ! हाल ही में जापान के इचिकावा सिटी ज़ू में जन्मा 7 महीने का जापानी मकाक बंदर “पंच”(パンチくん) सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। 26 जुलाई 2025 को जन्मे पंच को उसकी माँ ने जन्म के तुरंत बाद त्याग दिया। पहली बार माँ बनी इस बंदर ने उसे गोद में नहीं लिया, दूध नहीं पिलाया। ज़ू के कर्मचारियों ने उसे बोतल से दूध पिलाकर पाला और जनवरी 2025 से ट्रूप (समूह) में शामिल करने की कोशिश की।

द्वारा – मुख्य संपादक डॉ.नम्रता मिश्रा तिवारी http://indiainput.com
शुरुआत में पंच को अन्य बंदरों से मुश्किलें आईं—कुछ ने उसे घसीटा, डराया या अस्वीकार किया। अकेलेपन में पंच ने एक नरम ऑरेंजुटान का स्टफ्ड टॉय (जिसे “ओरा-मामा” कहा जाता है) को अपनी “माँ” मान लिया। वह इसे हर जगह घसीटता, गले लगाता, सोते वक्त चिपकाए रहता। यह दिल छू लेने वाला वीडियो वायरल हो गया—लाखों व्यूज, “कीप गोइंग पंच” हैशटैग ट्रेंड किया। ज़ू में विजिटर्स की लाइन लग गई, और खिलौने की बिक्री भी बढ़ गई।
In Japan, this long line was just to see a viral baby monkey named Punch-kun.
,insta- akashinjapan#lifeinjapan #viralmonkey #punchmonkey #indianinjapan #japanlife pic.twitter.com/gF4Ciq4OUP
— Sarthak P (@sarthakNowLive) February 23, 2026
#कीपगोइंगपंच
जानवरों में भी माँ का स्पर्श, गर्माहट और सुरक्षा का एहसास विकास के लिए आधारभूत होता है। पंच की तरह अनाथ बच्चे जब असली माँ की कमी महसूस करते हैं, तो वे किसी भी चीज़ को—चाहे वो खिलौना हो—उसकी जगह भरने की कोशिश करते हैं। लेकिन खिलौना कभी असली माँ की जगह नहीं ले सकता।
पंच की कहानी हमें माँ की गोद की कमी के गहरे मनोवैज्ञानिक प्रभावों की याद दिलाती है। जानवरों और इंसानों दोनों में प्रारंभिक वर्षों में माँ का स्पर्श, गर्माहट और निरंतर लगाव (अटैचमेंट) विकास की नींव रखता है। जॉन बोल्बी के अटैचमेंट थ्योरी के अनुसार, माँ की कमी (मैटरनल डिप्रिवेशन) से बच्चे में भावनात्मक असुरक्षा पैदा होती है। पंच की तरह अनाथ बच्चे असली माँ की जगह किसी वस्तु (ट्रांजिशनल ऑब्जेक्ट) से भरने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह कभी स्थायी नहीं होता।
इससे चिंता, अवसाद, अलगाव की भावना बढ़ती है। बच्चा भावनाओं को नियंत्रित करने में असमर्थ हो जाता है, आवेग नियंत्रण कमजोर पड़ता है, सामाजिक अलग-थलग रहता है और आत्मसम्मान घटता है।
जगभरातील लोकांचे लक्ष वेधून घेणाऱ्या ‘पंच’ या गोंडस माकडाच्या पिल्लाला पाहिल्यानंतर एका भारतीय मुलीने आपला अनुभव शेअर केला. #PunchMonkey #ViralStory #CuteAnimals #AnimalLovers #ViralNews #Heartwarming #JapanZoo #AnimalStory #TrendingNow pic.twitter.com/OhNoZjEWSM
— SaamTV News (@saamTVnews) February 23, 2026
7 महीने का अनाथ बंदर
मनोवैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि माँ की कमी वाले बच्चों में संज्ञानात्मक देरी (भाषा, समस्या-समाधान में कमजोरी), कमजोर कार्यकारी कार्य (ध्यान, योजना बनाना) और बाद के जीवन में डिप्रेशन, एंग्जायटी का खतरा अधिक रहता है। वे असहाय महसूस करते हैं, पर्यावरण पर नियंत्रण खो देते हैं और रिश्तों में कठिनाई झेलते हैं।
पंच के वीडियो में जब अन्य बंदर उसे घसीटते हैं, तो वह भागकर कोने में छिप जाता है—यह असुरक्षा का स्पष्ट संकेत है। माँ का प्यार सुरक्षित लगाव बनाता है, जो आत्मविश्वास, सामाजिक कौशल और भावनात्मक स्थिरता सिखाता है। इसकी कमी से बच्चा हमेशा मंजूरी की तलाश में रहता है, विद्रोही या निष्क्रिय बन सकता है।
अनाथ बंदर ‘पंच’ को मिला दोस्त; दूसरे बंदर ने लगाया गले!#PunchMonkey #JapanZoo #ViralVideo #EmotionalStory #StateMirrorHindi
Punch monkey Japan, orphan monkey Punch new video, Ichikawa City Zoo monkey pic.twitter.com/F2lO8koWz8
— State Mirror Hindi (@statemirrornewz) February 21, 2026
“ओरा-मामा”
खुशी की बात है कि पंच अब धीरे-धीरे सुधार कर रहा है। हाल के वीडियो में एक वयस्क मादा बंदर ने उसे गले लगाया, ग्रूमिंग की—ट्रूप में स्वीकृति मिल रही है। ज़ू के कर्मचारी (जैसे शिकानो) उसके लिए परिवार बन गए हैं। लेकिन मूल संदेश वही है: माँ का प्यार अनमोल और अपूरणीय है। पंच हमें सिखाता है कि एक छोटे बच्चे के लिए असली गोद की जगह कोई खिलौना या सहारा नहीं ले सकता।
माँ ने ठुकराया, तो खिलौने को बनाया सहारा! The Heartbreaking Story of Punch | Emotional Animal Story #punch #viralmonkey #viralvideo #punchmonkey #PunchMonkey #JapanMonkey #animalstory #emotionalstory #rajmahur pic.twitter.com/qhd13Kmv6K
— News Watch India (@NewsWatch_Ind) February 24, 2026
एक बड़ा सबक :
हर बच्चा—चाहे जानवर हो या इंसान—माँ की गोद, प्यार और सुरक्षा का हकदार है। इस कमी से होने वाले प्रभाव लंबे समय तक रहते हैं, इसलिए अनाथों की देखभाल, भावनात्मक सहारा और समय पर हस्तक्षेप बहुत ज़रूरी है।
“पंच की कहानी सिर्फ वायरल नहीं, बल्कि प्यार की कमी की गहराई और उसकी ताकत की मिसाल है। आइए, हम सब इस प्यार की कद्र करें और जरूरतमंदों की मदद करें।”
प्रतिक्रिया/Feedback : @contactindiainput.com
स्रोत :
https://www.city.ichikawa.lg.jp/zoo
https://www3.nhk.or.jp/nhkworld/en/news/20260219_19
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