संस्कृत और एआई का अनूठा संगम: बीटेक पाठ्यक्रम लॉन्च
प्राचीन ग्रंथों के डिजिटलीकरण और उन्नत एआई टूल्स के विकास में मील का पत्थर साबित होगा यह कोर्स।
संस्कृत और एआई का अनूठा संगम: बीटेक पाठ्यक्रम लॉन्च। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा शुरू की गई संस्कृत में बीटेक और डेटा साइंस की अभिनव पहल आधुनिक तकनीक और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में सराहे गए इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भारतीय भाषाओं और विशेष रूप से संस्कृत से जोड़ना है। नाशिक के पंचवटी परिसर में शुरू किए गए इस बहुविषयक पाठ्यक्रम से देश में तकनीकी शिक्षा और शोध की एक नई दिशा तय हो रही है।

By_ http://indiainput.com Desk
प्रवेश प्रक्रिया और सीटों का अनूठा संतुलन
इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए संस्कृत पृष्ठभूमि के छात्रों के साथ-साथ विज्ञान यानी भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित से बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को भी समान अवसर प्रदान किया जा रहा है।
पाठ्यक्रम में कुल साठ सीटें निर्धारित की गई हैं, जिनमें से पचास प्रतिशत सीटें संस्कृत पृष्ठभूमि के और पचास प्रतिशत सीटें आधुनिक विज्ञान या तकनीकी पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त इस अनूठी पहल से एक ऐसी नई पीढ़ी तैयार होगी जो आधुनिक कोडिंग और डेटा साइंस के साथ-साथ प्राचीन भारतीय ग्रंथों और पांडुलिपियों का भी गहन ज्ञान रखती होगी।
प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत भाषा की संरचना और व्याकरण संगणक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए अत्यंत अनुकूल है। पाणिनि के अष्टाध्यायी और माहेश्वर सूत्र जैसी प्राचीन रचनाएं भाषा को एक सूत्र में बांधने की अद्भुत क्षमता रखती हैं।
इस बीटेक पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्र भारतीय भाषाओं के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स विकसित कर सकेंगे। इसके अलावा, ज्ञान भारतम योजना के तहत देश भर में संरक्षित लाखों अपठित पांडुलिपियों और प्राचीन ग्रंथों को आधुनिक तकनीक की मदद से डिकोड करने और डिजिटल रूप में संरक्षित करने में भी इससे बड़ी सहायता मिलेगी।
तकनीक और परंपरा का ऐतिहासिक समन्वय
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास बरखेड़े के अनुसार यह कार्यक्रम केवल एक कौशल आधारित पाठ्यक्रम नहीं है बल्कि यह विज्ञान और शास्त्र दोनों का एक अनूठा संगम है।
आईआईटी और प्रमुख तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार किए गए इस पाठ्यक्रम से भारतीय संस्कृति, आयुर्वेद, वास्तुकला और तकनीकी क्षेत्रों का दायरा और अधिक विस्तृत होगा।
आने वाले समय में यह अभिनव पहल भारत को ग्लोबल स्टेज पर तकनीकी और ज्ञान के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी।
SOURCE :
http://sanskritadm.samarth.edu.in
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