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पवित्र शारदा बाली: श्रद्धा और एकता का प्रतीक

जानिए उस पवित्र रेत का इतिहास, जिसने सदियों पहले देवताओं के मार्ग को एक किया।

पवित्र शारदा बाली: श्रद्धा और एकता का प्रतीक। पुरी के ग्रांड रोड, जिसे ‘बड़ा डंडा’ के नाम से जाना जाता है, पर स्थित शारदा बाली केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी उस अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण है जिसने एक नदी के विभाजन को भक्ति के एक सूत्र में पिरो दिया। आज भी, रथ यात्रा के दौरान यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।

 

 

पवित्र शारदा
अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण

 

By_ http://indiainput.com Desk

प्राचीन बाधा और रानी शारदा का संकल्प

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 13वीं शताब्दी में जगन्नाथ मंदिर और गुंडिचा मंदिर के बीच ‘मालिनी’ नाम की एक नदी बहती थी। यह नदी दोनों पावन स्थलों को दो हिस्सों में बाँटती थी, जिसके कारण रथों को मंदिर तक ले जाना एक बड़ी चुनौती थी। तब रथों को पार ले जाने के लिए नौकाओं का सहारा लेना पड़ता था।

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जनश्रुति है कि रानी शारदा देवी ने भक्तों की इस कठिन पीड़ा को समझा और नदी के उस हिस्से को रेत से भरवाने का साहसी निर्णय लिया। उनके इसी पुनीत और दूरदर्शी कार्य ने दोनों मंदिरों के बीच एक सीधा मार्ग प्रशस्त किया, जिसे आज हम ‘शारदा बाली’ के नाम से जानते हैं।

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आज भी जीवित है परंपरा का उत्साह

शारदा बाली के प्रति श्रद्धा का यह ज्वार आज भी उसी प्रचंडता के साथ प्रवाहित हो रहा है। रथ यात्रा के दौरान जब तीनों भव्य रथ गुंडिचा मंदिर के समीप शारदा बाली पर रुकते हैं, तो वह दृश्य अलौकिक होता है।

लाखों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु इस पवित्र रेत को न केवल श्रद्धा से देखते हैं, बल्कि उसे अपने माथे से लगाकर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं। यह क्रिया केवल एक रस्म नहीं, बल्कि उस प्राचीन इतिहास के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का तरीका है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि इस रेत में साक्षात प्रभु का आशीर्वाद समाहित है। जब रथ यहाँ ठहरते हैं, तो पूरा वातावरण मंत्रोच्चार और जयकारों से गूंज उठता है।

यह स्थान आज भी हमें यह सिखाता है कि जिस प्रकार सदियों पहले आस्था ने भौतिक बाधाओं को दूर कर एक पुल का निर्माण किया था, ठीक उसी तरह आज भी यह स्थान करोड़ों हृदयों को भगवान जगन्नाथ की भक्ति में एकजुट करता है।

शारदा बाली केवल एक रेत का ढेर नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रतीक है जो हमें याद दिलाता है कि जब अटूट विश्वास हो, तो कोई भी दूरी या बाधा प्रभु मिलन में बाधक नहीं बन सकती।

SOURCE : 

https://stayatpurijagannatha.in

https://rathjatra.nic.in

https://puri.odisha.gov.in

https://www.shreejagannatha.in

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