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जय श्रीकृष्ण! कृष्ण कन्हैया के नाम, हर दिल में उत्सव

जन्माष्टमी पर हर अंदाज़ में कृष्ण भक्ति—मंदिरों से सोशल मीडिया तक गूंजा जय श्रीकृष्ण

जय श्रीकृष्ण! कृष्ण कन्हैया के नाम, हर दिल में उत्सव। भक्ति, संगीत, शरारत और शुभकामनाओं के बीच जन्माष्टमी बनती है हर दिल के कान्हा का उत्सव।

जन्माष्टमी पर छा गए नटखट नंदलाल
-Dr. Namrata Mishra Tiwari, Chief Editor http://indiainput.com

नंद के घर आनंद भयो

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म का पर्व होने के साथ-साथ प्रेम, आनंद और भक्ति का उत्सव है।

आधी रात को मंदिरों में होने वाली जन्म आरती से लेकर घरों में सजाई गई बाल गोपाल की झांकियों तक, हर जगह कान्हा के आगमन की खुशी दिखाई देती है।

कहीं वे नटखट बाल कृष्ण हैं, कहीं मुरलीधर, तो कहीं राधा के प्रिय श्याम।

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कान्हा की शरारत और Amul का अंदाज़

इस बार जन्माष्टमी की भावना को लोकप्रिय संस्कृति में खूबसूरती से पेश किया Amul ने।

उसके आकर्षक विज्ञापन में खुले हुए मक्खन के पैक, बिखरे हुए मक्खन के टुकड़े, मक्खन का चाकू और ऐसे संकेत दिखाई देते हैं जो सीधे वृंदावन के शरारती ‘माखन चोर’ कान्हा की ओर इशारा करते हैं।

इस रचनात्मक अंदाज़ ने लोगों का दिल जीत लिया। प्रशंसकों ने विज्ञापन को बेहद चतुर और प्यारा बताते हुए इसे कृष्ण की बाल लीलाओं से जोड़कर खूब सराहा।

Amul की मक्खन वाली पहचान और कान्हा की माखन-चोरी की कहानियों का यह मेल त्योहार की भावना को सहज तरीके से सामने लाता है।

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हर जुबां पर अलग शुभकामना

जन्माष्टमी की बधाइयां भी अलग-अलग रंगों में सुनाई देती हैं—“जय श्रीकृष्ण”, “राधे राधे”, “नंद के आनंद भयो”, “कान्हा आपके जीवन में सुख और प्रेम भरें” और “Happy Janmashtami”

भाषा अलग हो सकती है, लेकिन भाव एक ही रहता है—कृष्ण के प्रेम, आशीर्वाद और सकारात्मकता का स्वागत।

 

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भजनों में गूंजता कान्हा का नाम

संगीत जन्माष्टमी के उत्सव को और भी भावपूर्ण बना देता है। “अच्युतम केशवम्”, “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” और “यशोमती मैया से बोले नंदलाला” जैसे लोकप्रिय कृष्ण भजन वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।

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दही-हांडी से आधी रात की आरती तक

दही-हांडी की उमंग, मंदिरों की घंटियां, झांकियों की सजावट, घरों में झूला सजाते परिवार और आधी रात का जन्मोत्सव—हर परंपरा कृष्ण से जुड़ने का अपना रास्ता है।

आज सोशल मीडिया की शुभकामनाओं से लेकर पारंपरिक मंदिर उत्सवों तक, जन्माष्टमी हर पीढ़ी को अपने अंदाज़ में कान्हा के करीब लाती है।

इस जन्माष्टमी, कान्हा की मुस्कान में खुशी, उनकी मुरली में प्रेम और उनकी लीलाओं में जीवन का उत्सव खोजिए।

जय श्रीकृष्ण! राधे राधे!

 

SOURCE : 

http://www.indiaculture.gov.in

http://www.incredibleindia.gov.in

http://www.amul.com

 

FEEDBACK : Contact@indiainput.com

 

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