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पेट्रोल सियासत: 1973 का ‘ब्लैक बजट’ और आज का आत्मनिर्भर भारत

जब आधी कीमत में चरमरा गई थी देश की अर्थव्यवस्था, जानिए आज 1000 करोड़ का दैनिक घाटा सहकर भी कैसे मजबूत है भारत।

पेट्रोल सियासत: 1973 का ‘ब्लैक बजट’ और आज का आत्मनिर्भर भारत। आज जब समूची दुनिया पश्चिम एशिया के संकट से त्रस्त है, तो इतिहास के वे दिन याद आ जाते हैं जब 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मजबूरी में पेट्रोल की कीमत 1.60 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.75 रुपये कर दी थी। उस साल केंद्र सरकार ने जो बजट पेश किया था, उसे आज तक “ब्लैक बजट” कहा जाता है।

पेट्रोल पर सियासत:
पीएम की अपील पर हंगामा क्यों?

डॉ. सीमा सिंह, धनबाद, झारखंड द्वारा https://indiainput.com डैस्क के लिए

ऐसा इसलिए था क्योंकि उस समय अमेरिका और अरब देशों के बीच युद्ध छिड़ गया था, जिसने ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। इसके चलते देश में ऊर्जा के लाले पड़ गए थे और वह आर्थिक रूप से टिके रहने में भारत के बेहद संघर्षपूर्ण दिन थे। भारत के ऊपर पहले से ही पूर्व पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से युद्ध के कारण 550 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व बोझ पड़ा हुआ था। दूसरी तरफ बांग्लादेश से आए शरणार्थी, 1972-73 का भयानक सूखा और रक्षा बजट में बेतहाशा बढ़ोतरी ने सरकार के साथ-साथ आम आदमी की कमर तोड़ दी थी।

सिर्फ एक संयोग माना जा सकता है कि आज फिर वैसी ही परिस्थितियां दिख रही हैं? मौसम विभाग ने इस वर्ष भी देश में कम वर्षा होने की आशंका जताई है और खाड़ी देशों के हालात ने तेल की कीमतों को एक अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है।

 

हालांकि, 1973 और आज के हालात में जमीन-आसमान का अंतर है। आज हमारा सामूहिक विकास बहुत तेजी से हो चुका है। इस बड़ी उपलब्धि के बावजूद, यह भी सच है कि आज 140 करोड़ की विशाल आबादी की जरूरतें बेहिसाब बढ़ गई हैं। उन्हें पूरा करने के लिए हमें 1973 के मुकाबले कई गुना अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

नतीजतन, पेट्रोलियम पदार्थ आयात करने वाली कंपनियों का घाटा आज 1,000 करोड़ रुपये के रोजाना स्तर को पार कर गया है। इसके बावजूद, सरकार ने गुजरे गुरुवार  14/ 5/ 2026 तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बढ़ने नहीं दिया और उन्हें थामे रखा। भारत आज दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज के साथ-साथ कई महंगी सुविधाएं मुहैया करा रहा है। यह सब तब हो रहा है जब दुनिया की व्यापार व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और पाउंड तथा यूरो के मुकाबले भारतीय रुपया गिरावट के नए कीर्तिमान दर्ज कर मजबूत स्थिति में खड़ा है।

ऐसे गंभीर वैश्विक माहौल में, अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने के साथ-साथ सेना और अन्य आयातित वस्तुओं की खरीद से दूर रहने की अपील कर रहे हैं, तो इस पर हंगामा करने की कोई जरूरत नहीं है।

हमें अपनी संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर सरकार के इन कड़े और जरूरी कदमों में सहयोग करना चाहिए ताकि राष्ट्रहित सर्वोपरि रहे और “सबका साथ, सबका विकास” का संकल्प सच हो सके।

आम नागरिकों का यह परम दायित्व है कि वैश्विक हालात प्रतिकूल होने पर वे सरकार की नीतियों का सम्मान करें, न कि विरोध की राजनीति करने वाले राजनेताओं को बढ़ावा दें।

SOURCE : 

http://mygov.in

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