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महिलाएं और राष्ट्रहित: त्याग या चिंता?

देशहित की भावना और घरेलू बजट का तनाव

महिलाएं और राष्ट्रहित: त्याग या चिंता? प्रधानमंत्री की आर्थिक अपील पर देश की महिलाओं ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। घर की ‘लक्ष्मी’ और आर्थिक प्रबंधक होने के नाते, खाने के तेल में 10% की कटौती और सोने की खरीद पर रोक का सीधा असर उन पर पड़ा है। मध्यमवर्गीय गृहणियों का कहना है कि बजट पहले से ही सीमित है, लेकिन वे इसे एक ‘स्वस्थ्य चुनौती’ के रूप में स्वीकार कर रही हैं।महिलाओं के बीच ‘राष्ट्रहित’ और ‘कौटुंबिक जरूरतों’ को लेकर एक स्वस्थ विमर्श छिड़ा हुआ है।

By_ http://indiainput.com Desk
आर्थिक अनुशासन और राष्ट्रहित

‘आगा सोची सदा सुखी’

लोकोक्तियाँ कभी गलत नहीं होती हैं । एक भोजपुरी लोकोक्ति है ‘आगा सेची सदी सुखी’ । आज जब अमेरिका और ईरान युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं और किसी भी क्षण युद्ध आरंभ हो सकता है ऐसी स्थिति में भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व पर प्रभाव पड़ेगा ।

युद्ध छिड़ने पर अन्य देशों से महँगा क्रूड लेना पड़ेगा जिसके कारण देश में तेल बहुत महँगा हो जाएगा जिसका प्रभाव यातायात माल ढुलाई रसोई गैस आदि पर पड़ेगा । भारत के आयात में तेल नंबर एक पर है जो लगभग 240 – 250 मिलियन मिट्रिक टन है और दूसरे नंबर पर सोना ( प्रतिवर्ष लगभग 800 टन ) है नंबर दो पर ।

इन दोनों का भुगतान डॉलर में किया जाता है जिससे डॉलर के रिजर्व में कभी आएगी और महँगाई बढ़ेगी । किसी वस्तु की कमी होने की संभावना में उस वस्तु का उपयोग नियंत्रित कर दिया जाए , यह तात्कालिक उठाया जाने वाला कदम होता है । इसी को ध्यान में रख कर मोदी जी ने सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ा कर 15 प्रतिशत कर दिया है । मोदी जी ने पेट्रोल के विषय में यही किया ।

आप अपने जीवन में कुछ फैसले लें जिसमें साल सोना न खरीदें , यातायात के लिए सार्वजनिक वाहन का , वर्क फ्राम होम जैसे कदम उठाने के लिए कहा है । जनता ही नहीं सरकारी स्तर पर भी गाड़ियों की संख्या कम कर दी गई है । जो हमें भविष्य में संकट से पूरी तरह बचा न पाए तो भी कम अवश्य करेगी ।

-श्रीमती शची मिश्रा, लेखिका ,पुणे

 

 

वर्तमान समय में प्रधानमंत्री ने मितव्ययिता की जो अपील की है, यह उचित प्रतीत होती है।

वर्क फ्रॉम होम के जरिए पेट्रोल, डीजल, ईंधन के आयात में धन की कमी होगी। एक अनुमान के अनुसार भारत को करीब 80 kg सोना प्रति घंटे आयात करना पड़ता है। अगर हम संयम से काम लें तो छह अरब डॉलर की बचत होगी। सोना खरीदने के लिए जो पैसा खर्च होता है, उसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।

निजी वाहनों के बजाए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कारगर सलाह है।

विदेशी सामान का उपयोग कम करना, खाने का तेल कम प्रयोग करना, खेती में रासायनिक खाद की जगह प्राकृतिक खेती करने पर जोर दिया गया।

विदेशी दौरे पर 2024 में भारतीयों ने 31.7 अरब डॉलर खर्च किए थे, ऐसे दौरों से देश का पैसा विदेश में खर्च होता है।

यहाँ संयम के उपाय जरूरी हैं। अगर इन उपायों को हमने लागू कर लिया तो इस वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भी हमारा देश मजबूती से टिका रहेगा।

-Dr. सीमा सिंह, धनबाद, झारखंड

राष्ट्र निर्माण के लिए संयम और एकजुट प्रयास

प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया आर्थिक अनुशासन का यह आह्वान केवल एक नीतिगत निर्णय नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक मंदी के इस दौर में देश को मजबूती प्रदान करने के लिए उठाया गया एक आवश्यक कदम है. आज के समय में इन उपायों को एक जन-आंदोलन बनाना समय की मांग है।

आइए, हम सब मिलकर इस आर्थिक अनुशासन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। हमारा आज का थोड़ा सा संयम ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगा।

जय हिंद🇮🇳 Jai Hind🇮🇳

SOURCE :

https://www.narendramodi.in

https://www.pmindia.gov.in/en/ 

https://mnre.gov.in/en/

https://meity.gov.in

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