Biodiversity

पेड़ लगाओ, फोटो खींचो, भूल जाओ — यही है हमारा पर्यावरण प्रेम?

सच कड़वा है, लेकिन सुनना ज़रूरी है

पेड़ लगाओ, फोटो खींचो, भूल जाओ — यही है हमारा पर्यावरण प्रेम? हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। करोड़ों लोग पेड़ लगाते हैं, भाषण देते हैं, तस्वीरें खींचते हैं — और अगले दिन सब कुछ भूल जाते हैं। लेकिन क्या यही काफी है?

 पेड़

डॉ. सीमसिंह द्वारा लिखित, धनबाद, झारखंड से http://indiainput.com डेस्क के लिए

सच यह है कि हमारी पृथ्वी आज गंभीर संकट में है।

क्या हो रहा है हमारी धरती के साथ?

देश का आधे से ज़्यादा हिस्सा हर साल भीषण गर्मी की चपेट में आ जाता है। नदियाँ सूख रही हैं। जंगल सिमट रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में बाढ़ बढ़ रही है तो मैदानों में सूखा। समुद्र का जल-स्तर ऊपर उठ रहा है और तापमान हर दशक नया रिकॉर्ड तोड़ रहा है।

पक्षी और जानवर अपना घर खो रहे हैं। और यह सब इसलिए नहीं हो रहा कि प्रकृति कमज़ोर हो गई — बल्कि इसलिए कि हमने विकास की अंधी दौड़ में विनाश का रास्ता चुन लिया।

खेती और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर

जलवायु परिवर्तन सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं है। इसका सीधा असर किसानों की फसल पर पड़ रहा है। बेमौसम बारिश, सूखा और गर्मी — इन सबने खेती को अनिश्चित बना दिया है। इसके साथ ही मनोवैज्ञानिक यानी मानसिक समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। चिंता, तनाव और अनिश्चितता — ये सब जलवायु संकट की छुपी हुई कीमत हैं।

यह आखिरी चेतावनी है। अब और देर करने का वक्त नहीं।

तो अब क्या करें?

संयुक्त राष्ट्र ने 1974 से 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। इस साल की थीम है — “जलवायु कार्रवाई: प्रकृति से प्रेरित, हमारी जलवायु और पर्यावरण के लिए।”

लेकिन थीम पढ़ने से कुछ नहीं बदलेगा। बदलाव लाना होगा — और वो आज से, अपने घर से।

चार छोटे लेकिन ज़रूरी कदम जो आप अभी उठा सकते हैं:

  1. पेड़ लगाएँ — और उसे बड़ा होते देखने की ज़िम्मेदारी लें।
  2. पानी बचाएँ — हर बूँद कीमती है।
  3. सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को अपनी ज़िंदगी से बाहर करें।
  4. दूसरों को जागरूक करें — एक आवाज़ कई दिल बदल सकती है।

आने वाली पीढ़ी के लिए

अगर हम सच में चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित और हरा-भरा पर्यावरण मिले — तो सिर्फ एक दिन पर्यावरण दिवस मनाना काफी नहीं है। हमें हर दिन एक जागरूक नागरिक की तरह जीना होगा।

जब तक हम एकजुट होकर प्रकृति की ढाल नहीं बनेंगे — पर्यावरण को नुकसान होता रहेगा।

पढ़ना काफी नहीं। अब कदम उठाने का वक्त है।

 

स्रोत : 

https://fsi.nic.in

https://pib.gov.in 

https://moef.gov.in

 

FEEDBACK :contact@indiainput.com

 

और भी लेख पढ़ने के लिए बने रहें :  http://indiainput.com

Airport Retail Revolution: The Local Hero’s Edge

The Norwegian Knightfall: Pragg’s Masterclass !!

Andaman’s Gas Rush: India’s Energy Frontier Opens Up

#Assam1CrTrees: One Call One Crore Greener Horizon

हमारी थाली: शुद्धता का गहराता संकट

Leave a Reply

Your email address will not be published.

7 − two =

Back to top button